'पंधरा ऑगस्ट' दिन बहु मोठ्ठा

'पंधरा ऑगस्ट' दिन बहु मोठ्ठा   
भारत देशा स्वातंत्र्याचा    
खरेंच का प्रगतीशील आम्ही     
कि व्यर्थ मिरवीतो टेम्भा खोटा       

'चले जाव' अंग्रेज पळविले     
लोकशाही गणतंत्र अवतरले       
वर्षें सरली बाहत्तर तरीही    
'आरक्षण' आम्हा पुरून उरले          

खेडोपाडी न वीज न रस्ते    
शहरांत भले थोरले खड्डे   
रडा भेका कुणी न पुसतो     
जागोजागी मरण सापळे       

महागाईने कळस गाठला     
भाजीपाला पेट्रोल भडकती      
हवा पाणी खायचे का आता   
कसे जगावे सामान्य जनांनी           

अभिषेक दुधाचा वाटेवरती     
महादेवास कुणी न डरती     
सकळ जन वेठीस धरोनी      
लोट क्षीराचे फुका दवडिती         

राजकारणी सत्ताधारी  
रोज नवें आश्वासन भारी   
सत्ता स्वैराचारापायी      
कुठे कुणास देशाची पडली         

'पारतंत्र्य मनाचे' दशांगुळे उरले    
दुराचारास बळी पडले    
नासली बुद्धी संस्कार सोडूनी    
चोहीकडे तण कीड माजले        

माणुसकीची हार फिरुनीया   
श्वापदे विखारी नागवेच हिंडती      
कित्येक 'असमा' रोज चुरडत     
भारतभूस काळिमा फासती        

भ्रष्टाचारी नव नवे उगवती   
फसवून आम्हां फरार होती    
'स्वच्छता अभियान' नित्य गरजेचे    
दंडुके हाणूनी माथ्यावरती      

'जन गण मन' सन्मान राखण्या    
पाय पाऊले लुळे पडती    
छाती काढून खुशाल सांगती   
धुन राष्ट्राची नकोच म्हणती     

कौंस्तुभ मोती कितीक लोपले      
सीमेवरती रक्त पातले    
वीरमाता अन वीरपत्नीचे  
पुत्र अनमोल कुंकू सांडले        

काळे पाणी अन मंडाले    
पावन खिंडी मावळ खोरे      
अधोगती ही देखून सारी 
विद्ध होत ढसढसा रडले      

मंगळावरती स्वारी केली    
चंद्रही केला पादाक्रान्त आम्ही    
परी 'यान देशाचे' भरकटले की हो   
सोडून 'कक्षा' 'सद्बुद्धीची'       

'पंधरा ऑगस्ट' दिन बहु मोठ्ठा   
भारत देशा स्वातंत्र्याचा.......

-संगीता मुकुंद परांजपे     
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